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Zindagi

चलो एक दिन ज़िन्दगी का ज़िन्दगी के नाम करते हैं

मुस्कुराती हुई सुबह और फुर्सत भरी शाम करते हैं

इक रोज़ बाज़ार से घर को आते हुए

इक राह देखी थी सड़क से दूर जाते हुए

आज उस राह पे कदम दो चार चलते हैं

कुछ पेड़ों से, कुछ चिड़ियों से बात करते हैं

चलो एक दिन ज़िन्दगी का ज़िन्दगी के नाम करते हैं

न जाने कितने शहर गुज़रे मंजिल की दौड़ में

जाने कितने घर छूटे आगे बढ़ने की होड़ में

चलो खाली हाथ आज किसी यार के घर चलते हैं

और न खोने पाने का कोई हिसाब  करते हैं

चलो एक दिन ज़िन्दगी का ज़िन्दगी के नाम करते हैं

कुछ अपनों का कुछ परायों का

बहुत वज़न है दिल पे, अफ़सोस और दुआओं का

आओ आज हर दुश्मन को माफ़ करते हैं

अपने शहर की गलियों में बेपरवाह निकलते हैं

चलो एक दिन ज़िन्दगी का ज़िन्दगी के नाम करते हैं

मुस्कुराती हुई सुबह और फुर्सत भरी शाम करते हैं

किनारे पर बैठ कर लहरों को सलाम करते हैं

लिखते हैं रेत पे ऊँगली से नाम

मिट जाये तो अपनी बंदगी पे हंसते हैं

ना पूछते हैं हाल किसी का आज

ना सुनाते हैं कोई कहानी कल की

हाथ पकडे बस अगले मोड़ तक चलते हैं

चलो एक दिन ज़िन्दगी का ज़िन्दगी के नाम करते हैं

मुस्कुराती हुई सुबह और फुर्सत भरी शाम करते हैं ।

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चलो एक दिन ज़िन्दगी का ज़िन्दगी के नाम करते हैं
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