Spread the love
चेहरा – 
 
बढ़ने दो ज़रा रौशनी को आहिस्ता,
अर्से बाद खुद को आईने में देखा है।
.
वो कहते हैं चेहरा किताबों सा होता है
हाँ आँखों में आंसुओं का हिसाब तो लिखा है,
.
यादों की ग़ज़ल है कहीं,
कहीं सपनों के नज़ारे,
.
कहीं बस स्याही के निशान हैं,
कहीं लफ़्ज़ों का सैलाब लिखा है।
.
कुछ मुड़े हुए पन्नों में,
टूटा हुआ रुआब लिखा है,
.
सच है ज़िन्दगी का कोई मतलब तो न मिला,
पर मुस्कुराने का सबब बेहिसाब लिखा है।
.
ताज़ा लगते हैं कुछ किस्से अभी भी,
कुछ सवालों का न अब तक कहीं जवाब लिखा है।
.
कितनी कहानियां हैं एक किताब में,
हर कहानी ने खुद का एक किरदार लिखा है,
.
याद हैं वो खिड़की से झांकते गुलमोहर,
दिल पे आज भी हौसला तैयार लिखा है।
.
संवार लूँ थोडा इस चेहरे को आज,
के हर पन्ने के आखिर में किसी का प्यार लिखा है।

About the author

Aniket is a Business Consultant by profession – however his love of books led him to this website, where he posts book reviews and also gets together with new Indian Authors. He can be reached on aniketsitm@gmail.com.

Spread the word about us 🙂
Pleasant Reads Indian Poets : Chehra, A poem by Shubhanjali Jaiswal
Tagged on:     

2 thoughts on “Pleasant Reads Indian Poets : Chehra, A poem by Shubhanjali Jaiswal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)