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आजकल english का ही चाल-चलन है. हर मम्मी-पापा को लगता है की  उनका बेटा या उनकी बेटी एकदम high-fundoo अंग्रेज़ी झाड़े. ये ट्रेंड देश के teeny-boppers में जादा ही उफ़ान पे है. एक और ट्रेंड आजकल जोर मारती दिखाई देती है. आप सब उस से अवगत भी होंगे- social मीडिया का इस्तेमाल और उसके Side-effects.

आजकल ज़िन्दगी का हर एक लम्हा FB पे post कर दिया जाता है. मूवी देखी – FB पे कर दिया पोस्ट, सब्जी खरीदी – डाल दो FB पे, मंदीर गए- तो तुरंत अपडेट आ जाता है-feeling blessed.

15-20 साल पहले (जब orkut नाम की भी चीज़ प्रचलित नहीं थी) ना तो कोई मंदिर जाता था और न ही कोई लोगसिनेमा जाते थे. पूरा भारत अन्धकार के साए में ही था.

जीना तो आजकल के teeny-boppers ने ही सिखाया है- virtually.

क्रमशः अगर ट्रेंड्स १ और २ को मिलाया जाये तो एक depressing हकीकत सामने आएगी – आजकल के जीवन में क़िताब पढना एकदम un-cool हो चुका है, और अगर आप vernacular क़िताबे पढ़ते है तो भई आप तो गंवार हो. लोग आपका मज़ाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. (ये भारत की तमाम भाषाओं के लिए लागू होता है और ना ही सिर्फ हिन्दी. बाकी भाषाओं का और बुरा हाल है)

ऐसे में दिव्य प्रकाश दुबे जैसे लोग उम्मीद की लौ हाथ में धरे आगे चलते हुए दिखाई देते है. पेशे से मार्केटिंग मेनेजर- दिव्य अपने अनोखे अंदाज़ में बोलते है की  हिन्दी का “market share” भारत में ५०% है (१३ करोड़ अखबारों में ६.५ करोड़ हिन्दी में है) फिर भी लोग-बाग़ अंग्रेजी को ही भजते है.

दिव्य ने इस रास्ते पर शुरूवात, “Terms  & Conditions apply” नाम की किताब से की.  पर उनकी “मसाला चाय” ये किताब  मेरे हाथ लगी और फौरन मैंने पढ़ कर ख़तम भी की. ये किताब इसलिए अनोखी है क्यों की ये हिंगलिश में है – अंग्रेजी और हिन्दी की एक कॉकटेल!

मसाला चाय एक उपन्यास की तरह नहीं है – ये एक कहानियो का संग्रह है. किताब में कुल ११ शोर्ट- स्टोरीज है.  तरह-तरह के लोग और तरह-तरह की situations. सब की सब कहानिया भारत की एक झांकी की तरह.

आइये, थोड़ा मुलैज़ा फरमाते है और सिलसिलेवार कहानियों की समीक्षा करने की कोशिश करते है.

१. विद्या-कसम : कसमे-वादें, god-promise, mother-promise ये सब बचपन की बातों में ये कहानी ले के जाती है.कहानी का मुख्य किरदार आर्यन नाम का लड़का है – जिसकी उम्र ८-१२ के बीच  में है. उस पर ball चुराने के संगीन जुर्म का आरोप है. इसी आरोप को ले के उस के स्कूल में थोड़ी बेईज्ज़ती भी हो  रही है. घर पर सभो से पूछने के बाद (दादी से ले के नितिन भैय्या से मम्मी से तक) वो झूठ-मूठ की कसम खा लेता है की कसमे-वस्मे कुछ भी नहीं होती. कहानी के अलग ट्रैक में उसकी दादी और मम्मी की बिलकुल भी नहीं बनती, सो दादी अलग रहती है. कहानी का अंत थोडा unpredictable और दुखद है और परिणाम स्वरुप आर्यन चुराई हुई ball फेंक देता है (हाँ, ball उसने चुराई होती है).

. Jeevanshaadi.com : ये आजकल के हरेक लड़के की कहानी है. इस कहानी में वही हरेक लड़के की भूमिका बंटू निभा रहा है, जो की अब २७-२८ साल का हो चुका है. प्यार में असफलता, फिर नैराश्य, फिर माँ-बाप का शादी के लिए पीछे पड़ जाना, फिर ऑनलाइन matrimony साइट्स पे प्रोफाइल बनवा के लडकियों से चैटिंग करना. एक लड़की का पसंद भी आना – फिर उससे धीरे धीरे दोस्ती करना, दोस्ती का प्यार में बदलना, वही ,”I love You” का एक्सचेंज होना और फिर anti-climax, ठीक जैसे असल ज़िन्दगी में होता है. ज़िन्दगी झंड ही है- होते ही रहता है ये सबकुछ का realize होना. येही है Jeevanshaadi.com. थोड़ी मीठी और काफी सारी खट्टी. पर क्या ज़िन्दगी भी completely मीठी है?

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३. फलाना College of Engineering: ये कहानी पुरी किताब में easily सबसे बेस्ट कहानी है. ये कहानी हर उस engineering graduate से resonate करेगी जिसने अपनी engineering प्राइवेट कॉलेज से की है. किताब की शुरूवात इस लाइन से होती है –IIT में प्लेसमेंट होना एक बात है पर एडमिशन मिलना बड़ी बात. प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन होना एक बात है पर प्लेसमेंट होना बहोत बड़ी बात है.

ऐसे में किसी  प्राइवेट फलाना College of engineering में बच्चो को hire करने के लिए Mr.T.K Purohit की entry होती है जो की किसी बड़े कंपनी में big-shot है.

प्राइवेट engineering कॉलेज की स्ट्रगल तो सभी जानते है. पहले कोई KT न लगे इस का डर, उसके बाद ६०% से ऊपर नंबर आने का डर, नौकरी मिलेगी या नहीं मिलेगी ये हमेशा का खौफ लगा रहना और क्या प्यार मिलेगा, इसका डर.

Engineering college में कई मोहब्बते शुरू हो तो जाती है- पर जादातर कॉलेज के बाहर टिक नहीं पाती. प्लेसमेंट नाम का राक्षस बीच में जो आ जाता है. अपना हीरो तरुण इसी ही दलदल में कही फस के रह जाता है. कॉलेज में उसका मासूम प्यार पनपता तो है  पर उसकी आकांक्षाये धरी की धरी रह जाती है क्यूंकि प्लेसमेंट का राक्षस उसकी ज़िन्दगी में ज़हर घोलते रहता है.

नसीब और उसका रिश्ता दूर का है. इस हालत में उसके ग़म का एक ही साथी है- उसका दोस्त नितिन. हाँ, जिस लड़की को तरुण चाहता है,[शिवानी] उस का भी प्लेसमेंट हो जाता है.

कशमकश और काफी सारे इंटरव्यूज़ के बाद उसको एक बहोत लो paying जॉब मिल जाती है- जो की सॉफ्टवेर/आईटी में नहीं है, पर उसके फील्ड इलेक्ट्रॉनिक्स engineering से related है. Within a short span of time, तरुण की increment हो जाती है और उसकी सैलरी उसके बैच की सबसे हाईएस्ट[मुख्यतः शिवानी से ज़ादा] हो जाती है.

तरुण और Mr.T.K Purohit में भी बहुत गहरा रिश्ता है – जो कि कहानी के अंत में क्लियर होता है.

ये कहानी को ख़ास ५ में से ६ नंबर – काफी मिलती जुलती कहानी है न, इसीलिए.

४. Bed Tea:New-age युगुल, गौरव और यामिनी. बेड-टी, सेक्स और हाई-प्रेशर जॉब इन तीन सामग्रियों से  बुना गया ये ताना-बाना.कहानी weird सी है, but एक कहावत है -, “Fact is Stranger than fiction”, इसीलिए ये दिव्य का कौशल है की ये कहानी को carry-forward कर पाए.

५. Keep Quiet : किशोर अवस्था में प्यार के प्रति आकर्षण और सवाल. क्या होता है प्यार? क्या प्यार में दर्द है,अगर है तो कैसा है ये दर्द? येही सब इस कहानी में एक्स्प्लोर किया है. कहानी में ऐसा भी है, जिस से आप थोडा सहम जाएँगे, पर टटोलने पे तथ्य भी मिलेगा.Shock Value के लिए ४/५.

६. Love You Forever: क्या सफ़र का साथी वाकई में हमसफ़र बन सकता है या सिर्फ चार कदम साथ चलने वाला हमकदम?ऐसे मे कोई इन चार कदमो को जीवन का साथ समझ ले तो? कहानी का मुख पात्र कोई आम साधारण लड़का ही है,जिसे ट्रेन के सफ़र में गरिमा से प्यार हो जाता है.

उनकी बातें चिप्स और बैटरी से शुरू होती है.दोनों ही इस बात से अवगत है की ये प्यार का अंत शादी नहीं होगा. फिर भी एक विश्वास है.प्यार का ये एक सफ़र, न आगाज़ न अंजाम. बस यूँही चलते चलो…

७. Fill in the blanks: ये कहानी उस बच्ची-यश्वी की है, उस माँ- कावेरी की है जिस के जीवन में एक बहोत बड़ा blank है. बच्ची के पिता और माँ के पति – येही है Blank.

हमारे समाज में भी कई ऐसी यशवी और कई कावेरियाँ है, जिनकी लाइफ में blanks है. क्या ये blanks कभी भर पाएंगी? ये कहानी फलाना …. के बाद मेरी दूसरी पसंदीदा कहानी है. ४.५/५.

८. हम दो हमारा एक: एक साधारण से मोहल्ले की कहानी और इनमे पनपते रिश्ते. इन रिश्तो का कुछ नाम नही. हलके फुल्के प्यार, कुछ भाग दोस्ती और कुछ भाग शारीरिक आकर्षण के आधार पर बने ये रिश्ते. पर ये रिश्ते कुछ blossoming रिश्तो को तोड़ भी देते है. इस टाइप के रिश्ते बस यूँही बनते है और टूट भी जाते है. बस इसी टाइप के रिश्तो पर बनी ये ज़िन्दगी की झांकी.

९. Time: Over-Achiever मम्मी पापा की संतान कैसी होगी? उनके जितने ही Over- Achiever? पर अगर ऐसा न हो तो? Weight Of Expectations अक्सर घुटन पैदा करती है. इस कहानी में Weight Of Expectations  अंकित नाम के एक engineering छात्र पे है. उसके मम्मी पापा की आकांक्षाओ का बोझ उस पे है, पर उसका ध्यान कही और है. इसी कारण उसके और उसके परिवार के बीच में तनाव है. तनाव इतना बढ़ जाता है की फॅमिली उसे disown कर देती है. क्या वो अपने सपने पूरे कर पाएगा या कही बीच किसी मजधार में रह जाएगा? येही इस कहानी का मूल है. ये कहानी परिचित लगती है और Three Idiots  से inspired लगती है. पर कहानी का सन्देश आज भी उतना ही relevant (प्रासंगिक) है. ये सन्देश है – Life is not about  distance, its about direction, इसीलिए स्पेशल ५ में से ५ नंबर.

१०. केवल बालिगो के लिए: १०-१२ साल की उम्र में सवाल आते है मन में. बच्चे कैसे होते है? जो मूवीज लगती है थिएटर में, जिनका टाइटल, “ हुस्न का जलवा” होता है, उसे क्यों देख नहीं सकते? For Adults Only क्या होता है? एडल्ट होना क्या होता है? इत्यादि.  इन सब सवालों के जवाब out of syllabus होते है इस उम्र में.

तीन दोस्तों की ये कहानी आपको ज़रूर आपको अपने बचपन से रूबरू कराएगी.

११. Ruby Spoken English Class: ये इस संग्रह की सबसे आखिरी कहानी. जैसे की कहानी का शीर्षक बताता है, कहानी एक ऐसे क्लास के बारे में है, जो की आपको  इंग्लिश बोलना सीखा सके. ये क्लास उन बच्चो की तरफ targetted है, जिन्हें MBA तो करना है, पर उन्हें अंग्रेजी झाड्नी नहीं आती. Ruby Spoken English Class की मुझय अध्यापिका कोई  श्रीमती रूबी भाटिया करके है जो claim करती है की उनकी class सबसे best है. कहानी एक व्यंग्य है हमारे समाज पे जो की आगे चलने के लिए कुछ भी कर सकता है और ऐसे लोगो पे जो ये भांप गए है की समाज को इसी पॉइंट पे बकरा बनाया जा सकता है. काफी मजेदार कहानी है.

तो यह रही इस किताब की  समीक्षा. अब थोडा pros और cons के बारे में. किताब रोज़मर्रा के किरदार और उनकी कहानियों के बारे में है – इसिलए पाठक किसी न किसी कहानी स कनेक्ट कर पाएगा. किताब में कई जगहों पर अंग्रेजी में लिखा है – ये आजकल की चलती-फिरती स्टाइल के अनुरूप ही है. कहानी बताने का स्टाइल भी racy है – आप बोर नहीं होंग, उलटे ये सोचेंगे की नेक्स्ट कहानी कैसी होगी.

अगर cons के बारे में लिखा जाए, तो कुछ कहानियों में Sex पे  हीजादा जोर है, जो की कुछ पाठको को पसंद आये और औरो को न आये.

परन्तु एक बात सच है – इस तरह का कहानी संग्रह बनाना प्रशंसनीय है, at-least किसी ने तो कदम बढाए! ये भी सच है की एक दिन ज़रूर इन कहानियों पर मूवी बनेगी और खूब चलेगी भी! इस बात का इंतज़ार रहेगा.

समीक्षा के अंत में :- ये किताब ज़रूर पढ़े, लेखक को प्रोत्साहन के २ बोल कई बार लाख रुपयों से जादा भाते है. Writing Style: ४.५/५

स्टोरी: ४.५/५

Verdict : Must Read!

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About the author

Aniket is a Business Consultant by profession – however his love of books led him to this website, where he posts book reviews and also gets together with new Indian Authors. He can be reached on aniketsitm@gmail.com.

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मसाला चाय
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