Pleasant Reads Indian Poets : Chehra, A poem by Shubhanjali Jaiswal

Pleasant Reads Indian Poets : Chehra, A poem by Shubhanjali Jaiswal

चेहरा –    बढ़ने दो ज़रा रौशनी को आहिस्ता, अर्से बाद खुद को आईने में देखा है। . वो कहते हैं चेहरा किताबों सा होता है हाँ आँखों में आंसुओं का हिसाब तो लिखा है, . यादों की ग़ज़ल है कहीं, कहीं सपनों के नज़ारे,

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